'हां तुम !'

हां तुम !

 

  मैंने चाहा है तुमको

 मेरी चाहतों में तुम I

   गुजरे कल में तुम

 उगते सूरज में तुम I

   बहती हवाओं में तुम 

बरसते बादलों में तुम I

   खिलते फूलों में तुम 

ढलती शामों में तुम I

हां तुम !

 

मन की सुंदरता 

तन का सुंदर रूप I

लब तेरे मधुशाला 

हर अंग पुष्प की माला I

स्वप्न की परी  तुम

 हो यौवन रस का अमृत  प्याला I

हां तुम !

 

तुम जीवन ज्योति

 तुम करुणा तुम भक्ति

  तुम ही मेरा बंधन I

मेरा इश्क तुम  

मेरी जान तुम

 मेरा हर लम्हा तुमसे

 तुम ही मेरा दर्पण I

हां तुम !

 

बेचैन दिल तन्हा मन 

तस्वीर तेरी चूमते नयन I

मिलकर तुमसे  लिपटूंँ मैं ऐसे 

जैसे चंदन से लिपटे भुजंग I

मेरा ख्वाब मेरी हकीकत

 मेरी चाहत मेरा जूनू 

हां तुम !

 

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✍️ रचनाकार -- श्री बाल कृष्ण मिश्रा 

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